pagli

By shubham verma
Mar 04 2019 1 min read

सोई सोई सी रातो में जागी हो,तितली सी शर्म है तुममेबचपन की झलक है तुममेझुल्फे तो है नही पर जब बिखेर देती हो तो लगता है घटा छा जाती होसोई सोई सी रातो में जागी हो,पगला कर थोड़ा मुस्काना अच्छा हैहुंह, में तुम्हारा इनकार अच्छा हैबैठ कर सुन जाती हो , तुम ही तो समझ पाती हो

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