khayal

By shubham verma
Jun 08 2019 1 min read

लिखते लिखते शाम होने लगी,तुम आये नही के आंख रोने लगी,अकेले दीवारों से बात होने लगी,रोशनी आई नही के रात होने लगी।तसवीरें जिंदा और ज़िन्दगी लाश होने लगी,नींद आई के लिखावट मेरी सोने लगी।लिखते लिखते शाम होने लगी......

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