Intezaar

By Naveen Bhatt
Nov 08 2019 1 min read

Inspired by original one..... ​​​​मिल गयी ईक दफा, फिर से तुझसे नजर ​​​​​​होने लगी है लगा, रब की मुझ पे नजर.......... दिल को दडका दिया, मुझको सुलझा दिया........... फिर मेरी वफा के बदले , क्यो ये सिला मिला....... हॉं तेरा  इतंजार है, बस तुझसे प्यार है........ देख तेरे बिन यहॉंं , क्या मेरा हाल है।।। ।। हा तेरा ईतंजार है, कहॉ करार है........ याद संग तेरी, बेसुमार है।।।। खुद से है शिकवा मुझे, कर न सका ब्यान दिल काे मेरे मिलुंगा वंहॉ अब तुझे, रुह मेरी ,हवाले होगी  तेरे बस रख

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Reviews:

 

Such an amazing read! Thank you so much