Chal ghar chalen

By Naveen Bhatt
Jan 14 2020 1 min read

"inspired by original one.... ❤ सुनो जरा सुबह क्या हमसे कह रही ।। देखो जरा शामे यहॉं  कैसे बह रही ।। सोचुं यही तेरे बिना, क्या होगें हम ।।  चल घर चले मेरे हमदम ।। अब थक चुके है ये कदम, चल घर चले मेरे हमदम ।। ता उम्र प्यार ना होगा कम, चल घर चले मेरे हमदम ।। तु जो गई लगे यही, रब रुठ गया मुझसे ।। राते मेरी न कटे, बिना मिले तुझसे ।। शायद मिले किसी,मोड पर यहॉं हम ।। चल घर चले मेरे हमदम ।। सासें मेरी अब गई थम, चल घर चले मेरे हमदम ।। तेरे बिना क्युं जीये ह

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In parts, it is good but sometimes it seems a bit lost!!