Papa

By Abhishek Mishra
Dec 17 2019 1 min read

जब बैग टांग कर घर के बाहर खड़ा था ना मै, पापा    देखी थी तुम्हारी आंखें  एक बार फिर से मेरा हाथ पकड़ के चलना चाहते थे ना तुम मुझे कंधे पे बिठा के दुनिया दिखाना चाहते थे ना एक तुम ही तो हो, और कौन है  ये सवाल तुम्हे भी था और मुझमें भी  

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