है लाख दिल में दर्द गहरे

By Mukesh Negi
Sep 24 2020 1 min read

  है लाख दिल में दर्द गहरे सच-झूठ के कितने हैं चेहरे चाहे मगऱ जितना छिपालो छिप न सके मन के अंधेरे।। ये जिंदगी एक डोर है मुक्ति ही अंतिम छोर है इस झूठ के ही पार यारों अपना वो सच्चा भोर है।। कर्मों का आखिर खेल है माया का दुनियां जेल है फिर बंदगी से क्या मिलेगा मन मे छिपा जब मैल है।। गुज़रे सफ़र कि याद गहरी दिल मे बसी फरियाद गहरी दिखने लगा मंज़र निराला अब हो रही है शाद गहरी।। किसका रहा जग में ठिकाना कर्मों का बस है ऋण चुकाना म

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