लड़ना है तुझे मेरे लिये।

By Uttam Sharma
Sep 24 2019 1 min read

आज फिर मिली वो,रात में। यादों के साथ में। कुछ कहना चाहती थी शायद, पर दार था उसके आगोश में।​​​​​​​ सहमी हूं,तुझसे रूठी हूं,खुद से टूटी हूं। क्या सम्हाल पाओगे मुझे, में तो बस सपनों में रहती हूं। किसी सुनसान सड़क के किनारे, पड़ी है लाश मेरी। तुझे बता रही हूं, तू हमदर्द है मेरी। क्या बीती होगी मुझे पे, यह तुझे कैसे बताऊं। सबूत भी नही है पास मेरे, जो तुझे दिखाऊ। गैरों की भेष में, जब अपनों ने ही, किया यह घिनौना कांड है। रूह तो मेरी उस

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