मन

By Twinkle Saloni
Mar 11 2019 1 min read

मनये तो मन ह मचले गा ही,इसके विपरीत जाओ गे रोके गा ही।हमारा मन तो मुक्त गगन का पंछी हैं,इसे उड़ने दो उड़े गा ही।हमारा मन शान्ति के तलाश में बटकता रहे गा,तब तक समय तुझे छोड़ जाए गा।तू दो के बीच चुन नहीं पाए गा,अनंत में हताश होकर रुक जाए गा।तू खुशी को गले लगाने चाहे गा,दुख तेरे पिछे खड़ा होगा। क्यू की ये तो मन है, तेरे विपरीत जाए गा ही।ये पूरा संसार ही तेरा मन है,तू इसके दरिया में डूब जाए गा।तू इसकी क्षमता के पार रह जाए गा,क्

1 Reads
 0 Likes
Report

 

Reviews:

 

There is need little bit of improvement