बोलती खामोशी

By Abhishek Tiwari
Sep 02 2020 1 min read

||  बोलती खामोशी  ||   बेशक कभी-कभी हमारी खामोशियाँ भी बोलती हैं । जो बात हम अल्फ़ाज़ से बयां नहीं कर सकते वो बातें भी हमारी खामोशियाँ बयां देती हैं। ग़र हम खामोश हैं तो उसकी भी कोई वज़ह होती है, बस चाहिए होता है एक शख़्स जो हमारी खामोशियों को पहचान सके, हमारी खामोशियों को पढ़ सकें। वरना यूँ खामोश होकर फायदा ही क्या। हमारी खामोशियों के पीछे छिपा होता है हमारा दर्द। खामोशियों के पीछे छुपी होती हैं वो बातें जिनका ज़िक्र क

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