नजाकत-ए-इश्क को खुदा की

By Mukesh Negi
Sep 21 2020 1 min read

  नज़ाकत-ए-इश्क़ को खुदा की दुहाई मिल जाए बरसों तलक खोई उश़्शाक की वफाई मिल जाए आलम-ए-हक़ीक़त कि जरा गज़ब तो देखो इसे जुल्म के कफ़स से रिहाई मिल जाए।। एक लैला ढूंढ रही है अपने मजनूं को दर-बदर उसे खोया हुआ इश्क अपना शैदाई मिल जाए।। ये जरतई कैसी है जो मिटती ही नही दिल से इससे निजात पाने की कोई दवाई मिल जाए।। गुलज़ार ने बिखेर दि है अपनी सुग़ंध चौतरफ़ा इंसानों को भी खूबसूरती की सिधाई मिल जाए।। ग़र मिल जाता है खुदा बंदगी करने

6 Reads
 2 Likes
Report