दिल्ली 2

By Vishwas Vyas
Nov 08 2019 1 min read

एक भी पल जीना मुहाल हो चला है, हवा  से महरूम गरीब देखा है तुम्हें साँस भी जरा रुक रुक कर आती है, दिल्ली, बहुत करीब से देखा है तुम्हे।

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