तेरी यादें

By Ravi Prakash
Oct 09 2019 1 min read

यह कविता मेरी मां की याद में है। यह बात हाल की है, गत दशहरा की खुशियों में मैं चाह कर भी नहीं जा सका।                    तेरी याद जब छोटा था, और जब बड़ा हो गया तब भी, तेरा हाथ पकड़ के चला हूं मैं, बचपन के हर मेले में तेरे से कुछ ना कुछ जादू कर के अपने पसंद का खिलौना लेने को अरा था मैं। अब साथ नहीं तू, घुमु किस बात का, बड़े होने के बाद मेले के लिए नहीं, मेरे साथ के लिए मेले के अंतिम कोने तक चला था मैं।

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