तेरी निकहत जरूरी है

By Mukesh Negi
Sep 29 2020 1 min read

  तेरी निकहत जरूरी है खुदा इस जहान के लिए सदा गुस्ताख़ीयां माफ करना नाफ़रमान के लिए कभी हिस्सा न बनूं किसी कि बुराई का मैं थोड़ी सच्चाई देना मेरी इस बदजुबान के लिए।। अभी लबालब नही है मेरे रोम कि गहराई मैंने जगह बचाई है इसमें अपने ईशान के लिए।। गऱ दो पल का चैन ही नही तो जिंदगी खुशनुमा कैसी शानोशौकत ज़रूरी बन गई सभी के सम्मान के लिए।। सद़ाकत को नापाक़ कर दिया इस जमाने ने बहुत कुछ सदावर्त करते हैं तो अपनी पहचान के लिए।। अब

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