तकदीर ने कैसा अजीब

By Mukesh Negi
Sep 26 2020 1 min read

  तक़दीर ने कैसा अजीब ये खेल खेला है जीवन-मृत्यु का चक्र तो एक झमेला है खाली आए थे हम खाली जाना है हमें कुछ क्षण का समझो यहां पर मेला है।। जिस संपत्ति पे गुरूऱ और नाज था हमें उसके बावजूद भी रहा दिल अकेला है।। नादानियां बना देती है हर इंसान को अंधा बुराई ने ग़लत राह में हमेशा धकेला है।। क्यूं संभल नही पा रहा खुदा दिल अपना कितना बेशक़ीमती वक्त ये अलबेला है।। एक बंदगी ही है सगी ज़ायदाद अपनी बाकि हर रिश्ता यहां पर सौतेला है।

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