जो सरफरोशी बन गए हैं

By Mukesh Negi
Sep 20 2020 1 min read

  जो सरफ़रोशी बन गए हैं वो सजदे खुदा के चढ़ गए हैं उनके इरादे भी यक़ीनन पहले से ज्यादा बढ़ गए हैं।। शफ़ीक दुनियां में कहां है मेरा खुदा देखो वहां है जन्नत जिसे कहते हैं मुर्शीद बेशक नही जो ये जहां है।। माना की दुनियां है अनोखी करते हैं लोग देखा-देखी बावजूद इतने गुनाह के कपटी निगाहें अब भी भूखी।। कल की फिक़र ने आज मारा कितना मधुर है ये नजारा डूबा था मैं भव गर्दिशों मे मुझको खुदा ने फिर संवारा।। ज़ग ने हक़ीक़त को न माना मै

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