जमाने से गाफ़िल होकर

By Mukesh Negi
Sep 18 2020 1 min read

  जमाने से गाफ़िल होकर बातिन-ए-राज पढ़ना खुलूस कि निगाहों से गलीज़ ये समाज पढ़ना।। मस्जिदे-काबे की असल आवाज सुनाई दे ताज्जुब दिखेगा खुद में पहले इम्तियाज पढ़ना।। बेफिजूल मसूंबे कहीं खाली न करदे जिगर वाज़िब तरीकों से महज़ नज़रबाज पढ़ना।। खुदा की मह़र के आगे बिस़ात क्या दुनियां की फक़ीरों का कलमा नादुरुस्तों का ज़बांदराज़ पढ़ना।। इबादत नेकी कि बनाती है जीवन खुशनुमा "मुकेश" यकीन के तख्त पे बैठकर इश्क की नमाज पढ़

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