जिद हमारी

By Azad Upadhyay
May 26 2020 1 min read

दूर ले जायेगी हमको ये एक होने की ज़िद हमारी,  इक अलग दुनियां बसएगी ये ज़िद हमारी। जहाँ तेरी मुस्कुराहटें होगी, चेहरे पर हर दम हँसी होगी। होगा जहां पर ख़्वाहिशों का मेला, ख़्वाब भी फिर ना रह पाएगा अकेला , सजेगा फिर से खुशियो का दामन , बरसेगा जब फिर से जम कर सावन। आज़ाद

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