गरीब चोर से सहानुभूति

By T.C. Kaswan
Jun 14 2020 1 min read

एक भक्त थे, कोई उनका कपड़ा चुरा कर ले गया।कुछ दिनों बाद उन्होने उसे बाजार में बेचते देखा।दुकानदार कह रहा था कि 'कपड़ा तुम्हारा है या चोरी का' इसका क्या पता। हा अगर कोई सज्जन पहचान कर बता दे तो में अवश्य खरीद लूंगा।भक्त पास ही खड़े थे और उनका दुकानदार से परिचय भी था।उन्होंने कहा में इसे भली प्रकार से जनता हू।तुम कपड़ा खरीद लो तो दुकानदार ने कपड़ा खरीदकर दाम दे दिए।इस पर भक्त के एक साथी ने उनसे पूछा की आपने ऐसा क्यों किया।तो इस

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