खुश होके दिल में

By Mukesh Negi
Sep 20 2020 1 min read

  खुश होके दिल में रोष फिर भी कैसा मगर अफसोस फिर भी मधुशाला है हाथों में मेरे कायम है मेरा होश फिर भी।। मयखानों में बिकता नशा है मेरा वक़्त भी मुझमें हंसा है ये दिल कफ़स में कैद अबतक चंगुल में माया के फंसा है।। देखो बुराई की तबाही करनी है खुद से ही लड़ाई वशीभूत जब-तक रूह मन के तब-तक नही मुमकिन भलाई।। इस मन को जिसने मार डाला उसने पिया अमृत का प्याला सूरमा जो कहते हैं स्वयं को उनसे ये पूछो दो हवाला।। तक़दीर किसकी है निराली इ

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