खूनी बावड़ी

By Abhishek Tiwari
Nov 17 2020 1 min read

a:1:{i:0;s:8795:"                          ||  खूनी बावड़ी  ||            रोज की तरह आज भी हेमा गांव से बाहर जंगल में लकड़ी लाने गई थी। हेमा की मां हर शाम उसकी राह देखती हैं। लकड़ियां आती हैं तभी  इनके घर का चूल्हा जलता है। आज थोड़ी देर हो गई है । सूरज ढल चुका था और अंधेरा होने लगा। दूर से दिख रहा  गांव काले अंधेरे के गाल में समाता जा रहा था। चारों तरफ सुनसान। सन सन चलती हवाएं दृश्य को और भी भयानक बना दे रही थी। जंगल की त

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