कितना मधुर है गीत देखो

By Mukesh Negi
Sep 25 2020 1 min read

  कितना मधुर है गीत देखो मुर्शिद से कितनी प्रीत देखो सदियों से चलती आ रही है कभी खत्म न हुई रीत देखो।। करके मुकर जाने से पहले भव में उतर जाने से पहले खुद में संभल जाना मगर तुम सबकुछ बिखर जाने से पहले।। राहों में है कठिनाई लेकिन गहरी बुरी है खाई लेकिन इस क्षण का है अब क्या भरोसा अपना है बस एक सांई लेकिन।। नफरत की आतिश हर कहीं है न कुछ पता अब क्या सही है जिस गर्द के साए में थे कल आज भी शायद वहीं है।। कुछ कहने की अब हद नही है ये

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