उन आसियों को तेरे दर पर

By Mukesh Negi
Sep 18 2020 1 min read

  उन आसियों को तेरे दर पर जगह न मिले ये मज़रूह भी किसी को बेवजह न मिले।। जिंदा कब तक रहेगा जफ़ाकार करने वाला मुराद करने वालों को कभी भी खफ़ा न मिले।। नजर आ रहा है बरसों पुराना इक़ ख़्याल मुझको ग़म-ए-मोहब्बत की किसी को भी सजा न मिले।। उसकी इनायत भी करती है हैरत इस दिल को इबादत करने वालों को नादिम कजा न मिले।। उम्मीदें बरकरार रखना ग़फ़ूर-ए-ख़ुदा से "मुकेश" इश्क की राहों में कभी जख़्म-ओ-द़गा न मिले।।  

13 Reads
 4 Likes
Report