उठते जनाजे कह रहे हैं

By Mukesh Negi
Sep 21 2020 1 min read

  उठते जनाजे कह रहे हैं संदेश जग को दे रहे है वाक़िफ सभी है सच से लेकिन क्यूं दूर उससे रह रहे हैं।। गुंजाइशें दिल में बहुत है करने को लेकिन छल बहुत है मुश्किल तो फितरत बन चुकी अब मानो न मानो हल बहुत है।। ये कारवां चलता रहेगा रहमत का फल मिलता रहेगा गुस्ताखियां होती रहेगी और वक़्त भी ढलता रहेगा।। कहने को लेकिन तर्क कितने इस बात से हैं सतर्क कितने कि कल नही होगा किसी का फिर भी जहां में गर्क कितने।। कहीं धूप है कहीं है अंधेरा

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