आज की नारी

By Samriddhy Jindal
Apr 06 2019 1 min read

सदियां बदली, समय बदला, नारी का स्वरूप भी बदल रहा है । आज नारी किसी के सहारे की मोहताज नहीं है बल्कि वह दूसरों के लिए सहारा बनकर उभरी है। परिवार को समाज को हर जगह सबल और आधार बनकर सामने आई है नारी । नर चाहे कितना भी मजबूत हो वह सारी जिम्मेदारियां नहीं निभा सकता । ऊपर से चाहे कितना कठोर लगे पर अंदर से उतना ही कमजोर होता है। उसे अपने रोज के कार्यों के लिए भी सहारा चाहिए होता है। मर्द चाहे कितना भी सफल हो पर वह अपना जीवन अकेले नहीं

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The evolution has been written emphatically.
The usage of words is fantastic . It takes extreme stand at some points